ऋषिकेश: गंगा में डूबे तीन लापता युवकों के शव पशुलोक बैराज से बरामद; SDRF ने चेन मशीन की मदद से निकाला बाहर
ऋषिकेश/देहरादून: उत्तराखंड में गंगा नदी में अलग-अलग हादसों के दौरान डूबकर लापता हुए लोगों की तलाश में जुटे सर्च ऑपरेशन के तहत शनिवार को राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) को बड़ी सफलता मिली है. एसडीआरएफ की टीम ने पशुलोक बैराज के चैनल से तीन शवों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया है. बरामद किए गए तीनों शव उन व्यक्तियों के हैं, जो पिछले दिनों नदी के तेज बहाव में बह गए थे और जिनकी लगातार तलाश की जा रही थी.
डीप डाइवर्स ने ढूंढ निकाले शव, बैराज की चेन मशीन से निकाला बाहर
एसडीआरएफ के अधिकारियों के मुताबिक, विशेषज्ञ डीप डाइवर्स और आधुनिक उपकरणों की मदद से गंगा नदी के सभी संभावित और संवेदनशील स्थानों पर सर्च अभियान चलाया जा रहा था. इसी दौरान शनिवार को टीम को पशुलोक बैराज के चैनल में तीन शव फंसे होने की जानकारी मिली.
सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एसडीआरएफ कर्मियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और बैराज की चेन मशीन की मदद से अत्यंत सावधानीपूर्वक तीनों शवों को पानी से बाहर निकाला.
मृतकों की पहचान और हादसे का विवरण (कौन थे मृतक?):
शवों को बाहर निकालने के बाद मौके पर मौजूद परिजनों ने उनकी शिनाख्त की. स्थानीय पुलिस ने आवश्यक कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है. मृतकों का विवरण इस प्रकार है:
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शैलेंद्र महावर (30 वर्ष): निवासी ग्वालियर (मध्य प्रदेश). ये फूलचट्टी क्षेत्र में गंगा स्नान के दौरान डूबे थे.
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शौर्य नागर (20 वर्ष): निवासी गौतम बुद्ध नगर (उत्तर प्रदेश). ये तपोवन स्थित प्रसिद्ध साईं घाट पर हादसे का शिकार हुए थे.
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मनीष आर्य: निवासी जय विहार (दिल्ली). ये चंद्रेश्वर घाट पर डूबे उस दंपति में से थे, जिनकी तलाश पिछले कई दिनों से जारी थी.
मानसून से पहले बढ़ा खतरा: SDRF ने जारी की सख्त एडवायजरी
चारधाम यात्रा और पर्यटन सीजन के चरम पर होने के कारण इन दिनों उत्तराखंड के गंगा घाटों पर भारी भीड़ उमड़ रही है. इस दुखद घटना के बाद एसडीआरएफ ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों से बेहद सतर्क रहने की अपील की है.
एसडीआरएफ की मुख्य अपील:
सुरक्षित घाटों का ही करें रुख: केवल प्रशासन द्वारा चिन्हित और चेन/बैरिकेडिंग वाले सुरक्षित घाटों पर ही स्नान करें.
असुरक्षित स्थानों से रहें दूर: किसी भी प्रतिबंधित, अनजान या तेज बहाव वाले असुरक्षित स्थान पर नदी में उतरने की गलती न करें.
बच्चों पर रखें नजर: नदी किनारे बच्चों को बिल्कुल भी अकेला न छोड़ें.
लापरवाही पड़ सकती है भारी: मानसून की आहट के साथ गंगा का जलस्तर और प्रवाह अचानक बढ़ सकता है, इसलिए सुरक्षा नियमों का पूरी तरह पालन करें.
