डेनिस शराब विवाद पर हरीश रावत की चुनौती, बोले- SIT जांच कराए सरकार, मैं पेश होने को तैयार

भाजपा पर पलटवार कर पूछा सवाल, अगर डेनिस गलत थी तो आज सेना की कैंटीन में कैसे बिक रही है शराब?

देहरादून। उत्तराखंड में डेनिस शराब विवाद को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री एवं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल के बयान पर पलटवार करते हुए सरकार को मामले की निष्पक्ष जांच कराने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि यदि डेनिस शराब के मामले में कोई घोटाला हुआ है, तो सरकार इसकी जांच कराए। वह खुद जांच के लिए गठित कार्यबल के सामने अपना पक्ष रखने को तैयार हैं।

हरीश रावत ने भाजपा पर इस मुद्दे को बार-बार राजनीतिक बहस में उठाने का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि जिस शराब को लेकर पहले आपत्तियां जताई जा रही थीं, वह आज भी सेना की कैंटीनों में बिक रही है। उन्होंने पूछा कि यदि उस समय डेनिस ब्रांड गलत था, तो भाजपा सरकार के कार्यकाल में उसे सही कैसे माना जा रहा है? उन्होंने इस मामले में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय तथ्यों के आधार पर जांच की जरूरत बताई।

20 प्रतिशत आरक्षित अधिकार का नियम, फिर 70-80 प्रतिशत हिस्सेदारी कैसे?

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि गढ़वाल और कुमाऊं मंडल विकास निगम को आर्थिक रूप से मजबूत करने के उद्देश्य से शराब बिक्री का दायित्व दिया गया था। उनके मुताबिक, उत्तराखंड के फल और सब्जियों का इस्तेमाल करने वाले मदिरा निर्माताओं को 20 प्रतिशत आरक्षित विपणन अधिकार देने का आदेश था। इसके बावजूद तीन से चार महीने तक दूसरे ब्रांडों को रोककर यह हिस्सेदारी 70 से 80 प्रतिशत तक कैसे पहुंच गई, इसकी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने सवाल उठाया कि इस व्यवस्था के पीछे किसकी भूमिका थी और यदि नियमों का उल्लंघन हुआ, तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। रावत ने स्वीकार किया कि इस मामले में उनसे चूक हुई थी और यह भरोसे पर आधारित थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके सलाहकार समय रहते डेनिस प्रकरण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाए।

सुबोध उनियाल से जांच कराने की मांग

हरीश रावत ने कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को संबोधित करते हुए कहा कि अब सरकार में जिम्मेदारी उनके पास है, इसलिए उन्हें विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित कर पूरे मामले की पड़ताल करानी चाहिए। उन्होंने कहा कि आज बाजार में डेनिस के अलावा हिलटॉप, काफल, माल्टा और संतरा जैसे ब्रांड भी उपलब्ध हैं। ऐसे में जांच का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति को निशाना बनाना नहीं, बल्कि पूरे मामले की सच्चाई सामने लाना होना चाहिए।

रावत ने कहा कि वह शुरुआत में डेनिस नाम से भी परिचित नहीं थे और लंबे समय तक इसे डेनिम कहते रहे। उनके अनुसार, भाजपा की ओर से बार-बार इस मुद्दे को उठाए जाने के कारण उन्हें इसका नाम याद हो गया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि डेनिस विवाद में ‘मेरा डेनिस, तेरा डेनिस’ की राजनीति करने के बजाय निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई गलती हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए और जांच के निष्कर्ष सार्वजनिक होने चाहिए। उनके इस बयान के बाद प्रदेश में डेनिस शराब विवाद को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *