उत्तराखंड/ देश के चारों धामों में से एक श्री बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि का ऐलान हो चुका है । नर और नारायण पर्वत श्रृंखलाओं की गोद में स्थित भू- बैकुंठ धाम के कपाट खोलने की तिथि का आज बसंत पंचमी के दिन ऐलान हो गया है। श्री बद्रीनाथ धाम श्रद्धा और आस्था का अटूट केंद्र है, और भगवान बद्रीनाथ के दर्शन के लिए हर वर्ष देश-विदेश से लाखों भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं । शास्त्रों के अनुसार श्री बद्रीनाथ धाम को श्री हरि तप भूमि भी कहा जाता है, जहां भगवान नारायण स्वयं विराजमान हैं, कहते हैं “जो जाए बद्री, वो न आए ओदरी” यानि कि जो व्यक्ति भगवान बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है उसे जन्म-मरण के संबंध से मुक्ति मिल जाती है, इस वर्ष की बात करें तो टिहरी राज दरबार में बसंत पंचमी के शुभ मुहूर्त पर भगवान बद्रीनाथ के कपाट खुलने की तिथि का ऐलान हो गया है । भगवान बद्री विशाल के कपाट 4 मई को सुबह 6 बजे आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाएंगे, अब यहां 6 माह तक नर नारायण की पूजा करेंगे और जब शीतकाल में भगवान के कपाट बंद होते हैं तो तब देव यहां पर पूजा करते हैं,
आईए जानते हैं कैसे भगवान बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि तय होती है
बद्रीनाथ धाम के कपाट खोलने की तिथि सदियों से चली आ रही है परंपरा के अनुसार बसंत पंचमी के दिन टिहरी के राज दरबार में राजपुरोहित राजा की कुंडली में ग्रह दशा की गणना करते हुए धाम के कपाट खोलने की तिथि तय करते हैं, टिहरी नरेश को ही भगवान बद्री विशाल का कुल देवता माना जाता है,यहां राजशाही के समय से ही धाम की व्यवस्था मंदिर के खुलने बंद होने की घोषणा राज महल से की जाती है।
कपाट खोलने के बाद कैसे होता है अभिषेक।
कपाट खोलने के दिन पहले ही गांडू-घड़ा यात्रा के लिए प्रक्रिया निभाई जाती है, जिसमें नरेंद्रनगर राजमहल में महारानी राज्य लक्ष्मी शाह सुहागिन महिलाओं के साथ व्रत रखकर, मूसल-ओखली और सिलबट्टे से तिल का तेल पिरोती हैं इस तेल को जिस घड़े में रखा जाता है उसे गांडू कहते हैं, गांडू-घड़ा श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर में रखते हैं और फिर धाम के कपाट खोलने के समय बद्री विशाल की प्रतिमा का इसी तेल से अभिषेक किया जाता है।
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