देहरादून।
जिला पंचायत द्वारा जारी ई-निविदा को लेकर स्थानीय विज्ञापन व्यवसायियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। व्यवसायियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने पंचायती राज मंत्री मदन कौशिक को ज्ञापन सौंपकर निविदा को निरस्त करने की मांग की है।
व्यवसायियों का आरोप है कि निविदा की शर्तें इस तरह बनाई गई हैं, जिससे बाहरी बड़ी कंपनियों को फायदा पहुंचे, जबकि स्थानीय छोटे व्यापारियों के हितों की अनदेखी की जा रही है।
प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ‘विज्ञापन शुल्क वसूली’ और ‘यूनीपोल किराया’ जैसे दो अलग-अलग कार्यों को एक ही निविदा में शामिल कर दिया गया है। इसके चलते हैसियत प्रमाण पत्र (Solvency) की राशि बढ़कर 50 लाख रुपये हो गई है, जो स्थानीय व्यापारियों के लिए बड़ी बाधा बन गई है।
व्यवसायियों ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी ओर से दर्ज कराई गई आपत्तियों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। साथ ही, निविदा में अन्य राज्यों के अनुभव को प्राथमिकता दिए जाने और प्री-बिड मीटिंग आयोजित न करने को लेकर भी पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए गए हैं।
इस मामले में कुछ स्थानीय एजेंसियों ने न्यायालय का रुख भी किया है। व्यापारियों का कहना है कि यदि ठेका किसी बाहरी कंपनी को दिया गया तो स्थानीय व्यवसाय प्रभावित होंगे और मनमाने शुल्क वसूले जाने की आशंका है।
मंत्री मदन कौशिक ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच का आश्वासन दिया है। व्यापारियों ने मांग की है कि वर्तमान निविदा को निरस्त कर अलग-अलग कार्यों के लिए नई निविदाएं जारी की जाएं, ताकि स्थानीय व्यापारियों को भी समान अवसर मिल सके।
